[ चित्र: गूगल से साभार]
उसने बहुत कुछ सोचा था, अपने लिए, अपनी ज़िन्दगी
के लिए... कुछ छिटपुट सी चाहतें थी... कुछ सपने थे... कुछ हसरतें थी... उसके सपनों
में एक छोटा सा घर था... एक घर जिसे वह अपना कह सके... उस घर में खुशियाँ थी...
मुस्कुराहटें थी... प्यार था... चाहत थी... इज्ज़त थी... कद्र थी...
उसकी चाहतें पूरी भी हुई थी. बहुत कुछ मिला था
उसे... लेकिन बहुत कुछ नहीं भी मिला था... उसे तकलीफ भी हुई थी... उसे रोना भी आया
था... लेकिन उसने खुद से खुद को खुश रखने का वादा भी किया था... इसलिए वह
मुस्कुराई... जब वह मुस्कुराई तो उसे अपनी मुस्कराहट में किसी का अक्स नज़र आया...
वह उसका हमसफ़र था... अब उसे मालुम था कि उसकी मुस्कुराहटें किसी की राहतें भी
है... अब वह अक्सर मुस्कुराती रहती है... उसकी ज़िन्दगी में अब भी कुछ कमियाँ
हैं... लेकिन उसे अब ज़िन्दगी के खुशनुमा पल ज्यादा लुभाते है...

बेहतरीन शब्द स्नेहा जी
ReplyDeleteधन्यवाद संजय जी!
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